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Nalanda News: बिहारशरीफ में टोटो से कूदकर भागा कैदी, गलियों में 10 मिनट पीछा; स्थानीय लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहारशरीफ के लहेरी थाना क्षेत्र में पुलिस अभिरक्षा से भागा कैदी स्थानीय लोगों की मदद से पकड़ा गया। आरोपी को शराब की खेप के साथ गिरफ्तार किया गया था और जेल ले जाते समय वह टोटो से कूदकर गलियों में भाग गया था।

बिहारशरीफ, 23 अगस्त। नालंदा के बिहारशरीफ में पुलिस अभिरक्षा से एक कैदी के भागने की कोशिश से रविवार को कुछ देर के लिए पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। लहेरी थाना क्षेत्र के रांची रोड में जेल ले जाने के दौरान आरोपी पुलिस को चकमा देकर टोटो से कूद गया और संकरी गलियों में भागने लगा। हालांकि, पुलिस जवानों ने पीछा नहीं छोड़ा और स्थानीय लोगों की मदद से कुछ ही देर में उसे पकड़ लिया गया।

पकड़े गए आरोपी की पहचान अखिलेश कुमार के रूप में हुई है। वह इस्लामपुर थाना क्षेत्र के मोनमा गांव का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को शराब की खेप के साथ नालंदा मोड़ के पास पकड़ा गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे नियमानुसार मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया और फिर अदालत में पेश किया गया।

अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में दीपनगर जेल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रांची रोड के आसपास उसने पुलिस की नजर से बचकर भागने की कोशिश की।

टोटो से अचानक कूदकर भागा

पुलिस के अनुसार, आरोपी को टोटो के जरिए जेल ले जाया जा रहा था। रास्ते में उसने मौका देखकर अपनी हथकड़ी को सरका लिया। इसके बाद अचानक टोटो से नीचे कूद गया और पास की संकरी गलियों की तरफ तेजी से भागने लगा।

अचानक हुई इस घटना से पुलिस जवानों को कुछ क्षण के लिए संभलने का मौका नहीं मिला, लेकिन साथ चल रहे जवानों ने तुरंत पीछा शुरू कर दिया। आरोपी को गलियों में भागते देख पुलिसकर्मी लगातार उसे रुकने के लिए आवाज लगाते रहे।

पुलिस जवानों और आरोपी के बीच करीब 10 मिनट तक गलियों में दौड़भाग होती रही। संकरी गलियों के कारण आरोपी को पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की आवाज आसपास के लोगों तक पहुंची।

स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा

पुलिस के पीछे दौड़ने और शोर की आवाज सुनकर आसपास के मोहल्लेवासी भी सतर्क हो गए। लोगों को जैसे ही पता चला कि एक आरोपी पुलिस से बचकर भाग रहा है, कई स्थानीय लोग भी पुलिस की मदद के लिए आगे आ गए।

भागते हुए आरोपी को स्थानीय लोगों ने गली के एक मोड़ के पास घेर लिया। चारों तरफ से रास्ता बंद होने के बाद आरोपी के पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचा। स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया और मौके पर पहुंची पुलिस टीम के हवाले कर दिया।

आरोपी के दोबारा पकड़े जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। इसके बाद उसे फिर से पुलिस अभिरक्षा में लिया गया और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।

शराब की खेप के साथ हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, अखिलेश कुमार को शराब से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसे नालंदा मोड़ के पास शराब की खेप के साथ पकड़े जाने की बात पुलिस ने कही है। मेडिकल जांच और अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश हुआ था।

जेल ले जाते समय उसके फरार होने की कोशिश ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, आरोपी के भागने के तुरंत बाद पुलिस जवानों की सक्रियता और स्थानीय लोगों के सहयोग से उसे दोबारा पकड़ लिया गया।

पुलिस ने पूरी की आगे की कार्रवाई

मामले की जानकारी देते हुए थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने बताया कि आरोपी के भागते ही पुलिस टीम ने तत्काल उसका पीछा किया। स्थानीय लोगों की मदद से आरोपी को दोबारा पकड़ लिया गया।

पुलिस के अनुसार, आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अखिलेश कुमार को न्यायिक हिरासत में दीपनगर जेल भेज दिया गया है।

घटना में सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस अभिरक्षा से निकलने के बाद आरोपी ज्यादा दूर नहीं जा सका। पुलिस जवानों की तत्काल प्रतिक्रिया और स्थानीय लोगों के सहयोग ने उसे दोबारा पकड़ने में अहम भूमिका निभाई।

इस घटना के बाद पुलिस अभिरक्षा में आरोपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई पूरी कर आरोपी को फिर से जेल भेज दिया है।

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स्थानीय सहयोग ने पुलिस की बड़ी मुश्किल आसान की

पुलिस अभिरक्षा से किसी आरोपी का भाग जाना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर घटना होती है। बिहारशरीफ की इस घटना में भी आरोपी ने मौका देखकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जवानों की तत्काल कार्रवाई और स्थानीय लोगों की सतर्कता से वह ज्यादा दूर नहीं जा सका।

इस घटना का सकारात्मक पक्ष यह रहा कि पुलिस के पीछे दौड़ने और शोर सुनकर स्थानीय लोगों ने स्थिति को समझा और आरोपी को पकड़ने में मदद की। संकरी गलियों में स्थानीय लोगों की भूमिका पुलिस के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई।

हालांकि, ऐसी घटनाएं पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की जरूरत भी बताती हैं। कैदी को जेल ले जाते समय हथकड़ी और सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी जरूरी होती है। आरोपी के भागने की कोशिश के कारणों और उस दौरान सुरक्षा में कोई चूक हुई या नहीं, इसका आकलन भी महत्वपूर्ण है।

फिलहाल आरोपी दोबारा पुलिस की गिरफ्त में है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस घटना से एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ कि अपराधियों को पकड़ने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित तरीके से न्यायिक हिरासत तक पहुंचाना भी पुलिस व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

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